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शिवगंज शहर व आसपास के गांवों में होली को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। इस दौरान आसपास के गावो से लोग शिवगंज में खरीदारी करने आ रहे है। युवक-युवतियों के सामूहिक दल अलग-अलग घूमते-फिरते चंग बजाते हुए फाल्गुन के गीतों की प्रस्तुतियां देकर होली के रंग बिखर रहे है। साथ ही दल के सदस्य इस बार अपनी प्रस्तुति से कोरोना के प्रति जागरूक भी कर रहे है।

लेकिन, जिले में लगातार बढ़ रहे काेरोना संक्रमितों के बावजूद यहां लोग लापरवाह होते जा रहे है। लोगो की सतर्कता ख़तम होती जा रही है। बाजार में कई लोग बगैर मास्क के नजर आ रहे है और सोशल डिस्टेंस भी नहीं रख रहे है, जबकि सभी को कोरोना वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक कोरोना से बचने के लिए मास्क ही वैक्सीन है। शहर में नृत्य व गायक कलाकार युवक-युवतियां सामूहिक रूप से प्रतिदिन सुबह सज-धज कर आते है, जो दिनभर विभिन्न मोहल्लों स्थित आवासों व बाजार में दुकानों पर जाकर चंग को बजाते और नृत्य करते हुए फाल्गुनी गीतों की प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं का मनोरंजन करते है।

वही होली पर्व पर सामान, कपड़ों की खरीदारी के लिए आस-पास गांवों से लोग आने शुरू हो गए है, जिससे बाजार में चहल-पहल भी बढ़ गई है। वैसे इस बार कोरोना के कहर से होली त्योहार का रंग फीका लग रहा है, लेकिन पिछले वर्ष से इस बार बाजार में तेजी होने से व्यापारियों के चेहरों पर रौनक दिख रही है। बच्चों के ढूंढ़ोत्सव को लेकर भी कपड़ों, आभूषणों समेत विभिन्न सामग्री की जमकर खरीदारी हुई है। सोने के भाव बढऩे से कई व्यक्तियों ने तो इमीटेशन की दुकानों पर जाकर ज्वेलरी की खरीद की है। शहर में इस बार भी कई सामाजिक, व्यापारिक संगठनों ने पानी का बचाव करने एवं घातक रंगों से बचने के लिए गुलाल से होली खेलने का संकल्प लिया है। शिक्षण संस्थानों में भी जल बचाव के लिए सुखी होली कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है।

जागरूक क रही है नगरपालिका
नगर पालिका प्रशासन ने होली पर्व को ध्यान में रखते हुए कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए बाजार व आवासीय मोहल्लों में प्रतिदिन ऑटो घुमाकर माइक से लोगों को सावधानी रखने का संदेश दे रहा है। जिसमें मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंस रखने एवं सेनेटाइजर या साबुन से बार बार हाथ धोने की जानकारी दी जा रही है। नगर पालिकाध्यक्ष वजींगराम घांची ने बताया कि कोरोना अभी गया नहीं है, हम सबको इस वायरस को हराने के लिए सावधानी रखनी होगी। लापरवाही करना बड़ी भूल होगी। इसके बावजूद बाजार में कई लोग मास्क नहीं लगा रहे है और सोशल डिस्टेंस भी नहीं रख रहे है।

पानी बचने का दिया सन्देश
प्रसाशन ने होली त्योहार पर पानी के साथ रंगों के बजाय स्वैच्छिक रूप से घर-घर जाकर गुलाल या सूखे रंगों से होली खेलने का संदेश दिया है। रंगों से जल की बर्बादी होती है एवं पर्यावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। साथ ही मिलावटी रंगों से आंखों को नुकसान पहुंचने का अंदेशा रहता है। उन्होंने गुलाल से सूखी होली खेलने एवं परिजनों समेत अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया है।

Source: google news / Dainik bhasker

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