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रविवार के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का होना सर्वार्थसिद्धि योग का निर्माण करता है। इसफाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि रविवार को सर्वार्थसिद्धि योग में इस बार होलिका दहन होगा। होलिका दहन के समय अमृत सिद्धि योग भी रहेगा। भद्रा दोपहर को 1:52 तक ही रहेगी। उसके बाद पूरा दिन शुभ रहेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित शंभुलाल शर्मा ने बताया कि प्रदोषकाल में पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त हैं। शाम 6:38 से रात 8:56 बजे तक पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय रहेगा। इस बार होलिका दहन पर विशेष यह है कि दशकों बाद होली पर सूर्य व ब्रह्मा की साक्षी रहेगी, यह दुर्लभ संयोग है। धुलंडी सोमवार को मनाई जाएगी।

ज्याेतिषाचार्य शर्मा के अनुसार होली रविवार के दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, वृद्धि योग, विष्टि उपरांत बालव करण तथा कन्या राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है। किसी भी पर्व त्यौहार की शुभता के लिए पंचांग के इन पांच अंगों का अपना विशेष महत्व है। संयोग से इस बार ग्रहों की स्थिति तथा नक्षत्र मेखला की गणना से देखें तो उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र प्रदोषकाल के आरंभ का स्पर्श कर रहा है। शास्त्रों में इसका विशेष महत्व बताया गया है। योग में प्रदोषकाल का स्पर्श समस्त प्रकार के कार्यों में सिद्धि देने वाला बताया गया है। यह होलिका पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय है। धर्मशास्त्रीय मान्यता में भी होलिका पूजन के लिए प्रदोषकाल का समय ही सर्वोत्तम बताया गया है।

Source : Dainik bhasker / google

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