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इतिहास की खिड़की – पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े बांध, जवाई बांध के निर्माण की कहानी

jawai bandh history

जवाई बांध पाली जिले के पास स्थित एक छोटा सा गाँव है। वैदिक युग में ध्यान करने के लिए महर्षि जवाली नामक एक ऋषि ने इस क्षेत्र में आश्रय पाया। हिंदू कथा महाभारत के अनुसार, माना जाता है कि पांडवों ने निर्वासन काल के दौरान इस स्थान को कुछ समय के लिए अपना घर बना लिया था। 120 ई. में राजा कनिष्क ने जैतारण और रोहट क्षेत्र को जीत लिया था जो आज पाली का हिस्सा हैं। 7 वीं शताब्दी ईस्वी के अंत तक, चालुक्य वंश के राजा हर्षवर्धन ने राजस्थान के इन हिस्सों पर शासन किया।

मुगलो के आगमन के बाद, राजस्थान के राजपूत राजाओं ने उन्हें पीछे हटाने की कोशिश की, लेकिन घुसपैठ के कारण उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। 16 वीं और 17 वीं शताब्दी के अंत तक, पाली और आसपास के सभी क्षेत्र राठौरों के मारवाड़ के शासन में गिर गए। 1857 के विद्रोह के समय, पाली के ठाकुरों ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठा लिए और संघर्ष कई दिनों तक चला। आऊवा के ठाकुर खुशाल सिंह की कथाएँ आज भी जोश भर देती है । इस क्षेत्र में रहने वाले लोगो में रबारी बहुमत में है, बाकि निवासी अलग-अलग धर्मो से आते है।

जवाई बांध का निर्माण जोधपुर के राजपूत राजा महाराजा उम्मेद सिंह जी ने 12 मई 1946 को शुरू करवाया। ये बांध 1957 के आस-पास बनकर तैयार हुआ। इसे बनाने में लगभग 2 करोड़ 7 लाख रुपये का खर्च आया। बांध के निर्माण का मुख्य कारण सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करवाना था।

आज जवाई बांध पाली और जालोर जिले के कई गाँवों की प्यास बुझाता है। सेई बांध व कालीबोर बांध इसके सहायक बांध है।

इसकी कुल गहराई 61. 25 फ़ीट है।

नज़दीकी रेलवे स्टेशन जवाई बांध स्टेशन है।

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